Thursday, February 2, 2017

शेड्यूल्ड कास्ट और शेड्यूल्ड ट्राइब्स के साथ धोख़ाधड़ी


अलग अलग खातों के प्रावधान को जोड़कर आंकडों के गुब्बारे फुलाने का खेल सरकारें खेलती रहती है- पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी को  इस खेल के उस्ताद मानना होगा.

बड़े आश्चर्य की बात है, के दलित नेता, बुद्धिजीवी और पत्रकारों को  मोदीजी ने भारतीय योजना आयोग बर्ख़ास्त करके दलित तथा आदिवासियों के लिए मौजूद कल्याणकारी योजनाओंपर जो कैंची चलायी है, वह अभी तक दिखायी नहीं पड़ी है.

शेड्यूल्ड कास्ट और  शेड्यूल्ड ट्राइब्स उपघटक योजना के माध्यम से आजतक  योजना बजेट से 22.5% रकम  इन दुर्बल घटकों के विकास के लिए मिला करती थी. मोदी सररकारने अपने पहले ही वर्ष इस योजना में 20,000 की कैंची लगायी और पिछले वर्ष यह कमी 40000 कोरोड की थी. बताया जा रहा है, के इस वर्ष इस प्रावधान में  35% वृद्धि की गयी है. मतलब 38,833 करोड़ से बढ़कर इस वर्ष  यह प्रावधान  52,393 करोड़ बताया गया  है.  वास्तव में यह सीधी सीधी धोख़ाधड़ी है.

इस वर्ष अल्पसंख्यकों के लिए किया गया प्रावधान भी इसी 52,393 करोड़ में शामिल है, जो पिछले वर्ष तक अलग से किया जाता था.  यह प्रावधान 4195 करोड़ रूपये का है.  मतलब अगर यह रकम अलग करें और पिछले दो वर्षों में घटाया गया प्रावधान देखें , तो इस धोखाधड़ी का पता चलता है.

प्रावधान का यह तरिका 1975 से चला आ रहा था.
मनमोहन सिंग सरकारका आखिरी बजट 17 लाख करोड़  रूपये का था और उसमे योजना का बजट  बजेट  तकरीबन 7 लाख करोड़. इसमें से 22.5% हिस्सा याने डेढ़ लाख करोड़ रूपये SC और ST इन घटकों के विकासपर खर्च हुवे थे. पिछले तीन वर्षों में कुल बजट  21 लाख करोड़ रूपये तक पहुँच गया-  इसका मतलब है योजना बजट अगर होता तो वह 9 लाख करोड़ का  होता , और SC/ ST  घटकों पर 2 लक्ष करोड का प्रावधान होता, आज यह रकम सिर्फ 48,198 करोड है.

इस रकम की भरपाई राज्य सरकारों से करने का छलावा दिया जा रहा है, पर जहाँ केंद्र सरकारसे आया पैसा भी  राज्य सरकारें नही खर्चती, वहाँ अपने  हिस्से से  वह रक्कम खर्च करेंगे यह दूर की बात हो गयी.

हिंदी अनुवाद:- किरण पाटील