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Wednesday, February 26, 2020

मोदी सरकारने ६६% मागासवर्गीयांचा निधी ३४% प्रबळांकडे का वळवला?

मोदी सरकारने ६६% मागासवर्गीयांचा निधी ३४% प्रबळांकडे का वळवला? प्रा.हरी नरके
देशाचे पंतप्रधान श्री नरेंद्र मोदी निवडणुक प्रचार सभांमध्ये बोलताना आपण मागासवर्गीय आहोत अशी दवंडी पिटीत मतांचा जोगवा मागत असतात. पण तेच मोदी देशाच्या अर्थसंकल्पात ६६% मागासवर्गीयांचा हक्काचा विकास निधी उच्चभ्रूंकडे वळवतात, हा त्यांचा विश्वासघात नाही का? संतापजनक बाब म्हणजे मागासवर्गीयांच्या निधीवर दिवसाढवळ्या सरकारी दरोडा घातला जात असताना अर्थशास्त्रज्ञ खा. नरेंद्र जाधव, केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले आणि अनुसुचित जाती, जमातींचे १३१ खासदार व्यक्तीगत स्वार्थासाठी मौन बाळगतात.

मोदींनी २०१४ साली आल्याआल्या प्लॅन बजेट आणि नॉनप्लॅन बजेट ही मागासवर्गीयांच्या हिताची विभागणी आधी बंद केली. कारण त्यानुसार प्लॅन बजेटमधील २५% निधी अनुसुचित जाती व अनु. जमातींच्या शिक्षण, आरोग्य, रोजगार, रोटी, कपडा, मकान, बिजली, सडक, पाणी यांच्यावर खर्च केला जात असे. हा पैसा गावपातळीपर्यंत पोचत असे. हा उपघटक योजनेचा { श्येड्य़ुल कास्ट सब प्लॅन आणि श्येड्युल ट्राईब सब प्लॅनचा } पैसा निम्म्यापेक्षा कमी केल्यामुळे मुलामुलींचे शिक्षण थांबले आहे. शिष्यवृत्ती मिळत नाही. रोजगार नाही की आरोग्यासाठी निधी मिळत नाही.

२०२०-२१ चा अर्थसंकल्प ३०,४२,२३० कोटी रूपयांचा आहे. त्यातला अनुसुचित जाती व जमातींच्या विकासासाठी हक्काचा निधी मिळायला हवा होता रु. ३,०४,२२३/- मात्र मोदी सरकारने दिलेला निधी आहे अवघा रु. ८३, २५७ + रु. ५३, ६५३ = १, ३६, ९१० कोटी रुपये. म्हणजे यावर्षी १, ६७, ३१३ कोटी रुपयांचा निधी कमी दिलेला आहे. हा सगळा पैसा मिळाला असतात तर दरडोई रक्काम झाली असती रु.९५०६/- सध्या मात्र ती अवघी ४२७८/- रुपये दिली गेलेली आहे. मागासवर्गीय समाजाच्या हिश्श्यातून झालेली ही सरकारी पॉकेटमारी
दिवसाढवळया गेली सहा वर्षे राजरोसपणे चालू असताना त्याबद्द्ल बोलले वा लिहिले का जात नाहीये? आमचे सर्व माननीय प्रज्ञावंत, सर्वज्ञ नेते, सदैव प्रकाशझोतात असलेले बुद्धीवंत, धडपडे पत्रकार, फेसबुकी विचारवंत, बिचारे लेखक आणि स्वयंप्रकाशित कलावंत यांनी आपले ऎतिहासिक मौन सोडून यावर बोलावे, लिहावे ही नम्र विनंती.

सरकारी आकडेवारीनुसार देशात अनु. जाती, जमातींची संख्या २५ टक्के आहे तर ओबीसींची संख्या ४१ टक्के आहे. मंडल आयोगाने ही संख्या ५२ टक्के सांगितलेली होती.

सरकारच्या मते ह्या तिघांची संख्या होते ६६ टक्के तर प्रबळ समाजाची संख्या आहे ३४ टक्के.
मोदी दस्तुरखुद्द ओबीसी असल्याचा डांगोरा पिटीत असतात. त्यांनी सुमारे ६५ कोटी ओबीसींसाठी अर्थसंकल्पात दिलेत रुपये २२१० कोटी. म्हणजे दरडोई दरवर्षी रुपये ३४. दिवसाला ९पैसे. जय मोदी.जय ओबीसी. जय ९ पैसे.

यालाच कुर्‍हाडीचा दांडा गोतास काळ असे म्हणत असावेत.

-प्रा.हरी नरके, २५/०२/२०२०

Monday, February 24, 2020

मोदी सरकारने 34 % लोगो के लिए 66% का दानापानी क्यों कम किया?














मोदी सरकारने 34 % लोगो के लिए 66% का दानापानी क्यों कम किया?-प्रो.हरी नरके

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी हर इलेक्शन कॅम्पेन में मैं खुद पिछडे समाज सें हूं की गुहार लगाते घुमते हैं! लेकीन जब देश के बजट मुद्दा आता हैं तो वें 34% उंचे लोगों के लिए ही काम करते हैं. 2014 से हरसाल उन्होंने अनुसुचित जाती और अनुसुचित जनजाती के बजट में कटौती की हैं. दुर्भाग्य यह हैं की इसके बारे में अर्थशास्त्री होकर भी राज्यसभा सदस्य डॉ. नरेंद्र जाधव और राज्यमंत्री रामदास आठवले व्यक्तीगत फायदे के लिए चुप्पी साधे बैठते हैं. इस महत्वपुर्ण विषयपर अनु.जाती/ जनजाती के 131 सांसद भी चूप क्यों हैं? विपक्ष और मिडीयां भी मुह कों ताला लगाकर बैठे हैं.

मोदीजी ने आते ही प्लान बजट और नॉनप्लान बजट का हिसाबकिताब बंद करवा दिया. क्यों? क्यों की प्लान बजट से 25 फिसदी पैसा अनु.जाती/जनजाती के विकास के लिए दिया जाता था. शेड्युल्ड कास्ट सब प्लान और शेड्युल ट्राइब सब प्लान का यह पैसा हर गाव, देहात, बस्तीतक पहुंचता था. उनके पढाई, दवाई, रोजगार, बिजली, सडक, पाणी, घर, अनाज के लिए इस्तेमाल किया जाता था.
2020-21 का बजट 30,42,230  करोड रुपिया का हैं.
उसमें से अनुसुचित जाती के विकास के लिए कितना पैसा दिया गया हैं? रु. 83,257+ रु. 53,653 =1,36,910  करोड रु.

मिलना कितना चाहिए था? रु. 3,04,223  करोड रु. याने की मोदी सरकारने इनके विकास के पैसे में कटौती कितनी की हैं? 1,67,313  करोड रु. की. याने की जितना दिया हैं वह आधे से कम हैं.

अगर बराबर मिलता तो हर अनु.जाती/जनजाती के नागरिक के पक्ष में एक साल के लिए 9,506 रुपिया उपलब्ध होता. अब उसमे से आधे से कम याने की4278  रुपिया ही मिला हैं.

सरकार के आंकडे कहते हैं की, देश में अनु.जाती/जनजाती की आबादी करीब करीब 25 फिसदी हैं और ओबीसी की 41 फीसदी. तिनो की कुल आबादी 66%

जो मोदीसाहब अपने आप को अन्य पिछडी जाती का सदस्य होनेका दावा करते हैं उनके लिए उन्होंने अपने बजट सिर्फ और सिर्फ रु. 2210 करोड. इसका मतलब हर ओबीसी नागरिक के लिए एक साल के लिए आता हैं रु.34/- मात्र. हर दिन के लिए 9/- पैसा. क्यों की मोदीजी खुद ओबीसी हैं तो उन्होंने ओबीसी के विकास का कितना ध्यान रखा हैं!

बंगाल और बिहार राज्यों कें चुनाव जल्द ही आनेवाले हैं. इन दो राज्यों में अल्पसंख्यक समाज की संख्या सबसे ज्यादा हैं. इसलिए शायद देश के 26 करोड मायनॉरिटी के विकास के लिए 1820  करोड रु. का प्रावधान किया हैं. हरएक व्यक्ती के लिए सालभर के लिए मिलेगा रु. 91//-

एस.सी., एस.टी. ओबीसी, मायनॉरिटी को इसे पढकर खुशिया मनानी चाहिए. क्योंकी मोदीजी इनके चहेते हैं. जय मोदीजी. जय 9/- पैसा.
-प्रो. हरी नरके
संदर्भ के लिए पढिए-
https://www.indiabudget.gov.in/doc/Budget_at_Glance/bag5.pdf
https://www.indiabudget.gov.in/budgetglance.php
https://www.indiabudget.gov.in/doc/Budget_at_Glance/bag7.pdf
https://www.indiabudget.gov.in/doc/Budget_at_Glance/bag6.pdf
https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/stat3a.pdf
https://www.indiabudget.gov.in/expenditure_profile.php
https://www.indiabudget.gov.in/
https://www.indiabudget.gov.in/doc/Budget_at_Glance/bag1.pdf

क्या केवल 17 पैसे इन्कम टॅक्स देनेवाले देशके मालिक होते है?
















क्या केवल 17 पैसे इन्कम टॅक्स देनेवाले देशके मालिक होते है? तो 83 पैसे देनवाले आम लोग कौन होते हैं? - प्रो.हरी नरके

आजकल बारबार सुनने में आता हैं की, We the Tax Payers  हम टॅक्स पेयर का पैसा सरकार उनपर कैसे खर्चा कर सकती हैं?

मतलब हम इन्कम टॅक्स देते है तो क्या सचमें सिर्फ हम ही देश के मालिक बनते है?

दुनिया में ऎसा कौनसा देश हैं जहॉपर टॅक्स नही देना पडता हैं? टॅक्स देना क्या देशपर मेहरबानी करना हैं? आप उंचे लोग टॅक्सपेयर हो तो क्या गरिब लोग टॅक्स नही देते हैं?

खासकरके जो मुठ्ठीभर लोक इनकम टॅक्स देते उनको क्यों ऎसा लगता हैं की देश केवल उनके ही पैसो से चलता हैं?

1 फरवरी को देश का बजट खुल गया. निर्मला सीतारमन द्वारा प्रस्तुत किये गये 2020 -21 के इस बजेट में 30 लाख करोड से ज्यादा का खरचा मोदी सरकार करेगी. इस वर्ष में जो पैसा टॅक्सद्वार सरकार के पास जमा होगा उसको अगर एका रूपिया माना गया तो उसमें से सिर्फ और सिर्फ 17 पैसे इनकम टॅक्स द्वारा मिलते हैं. बाकी 83 पैसे जिनसे मिलते हैं, क्या वे टॅक्सपेयर नही हैं?

हां, अलग अलग इनडायरेक्ट टॅक्सद्वारा देशके सभी नागरिक { जिनमें गरिब भी हैं, भिकारी भी हैं, हर नागरिक हैं } सरकार को एक रुपिया मे सें 83 पैसा देते हैं. लेकीन उनके बारे मे बात करते समय ये उंचे लोग गाली देनेवाली भासा का प्रयोग क्यों करते हैं? निर्भत्सना क्यों करते हैं?

जो कोई नागरिक चाय पिता हैं, रोटी खाता हैं, कपडा पहनता हैं, मकान में या जुग्गी झोपडी में रहता है, इन सभी चिजोपर जी एस टी देता हैं वह हर एक नागरिक देश का टॅक्सपेयर हैं. जी एस टी द्वारा सरकार को ज्यों पैसा मिलता हैं वह इनकम टॅक्स से भी ज्यादा होता हैं. कार्पोरेट कंपनीया जब टॅक्स देती हैं, उत्पाद [एक्साईज] कर देती हैं, सीमा शुल्क [कस्टम] देती हैं तो वह सभी पैसा उनके द्वारा बनायी गयी चिजे जो खरिदते हैं उनके जेब से आता हैं. केवल इनकम टॅक्सवालों के जेब से नही. क्योंकी यह इनडायरेक्ट टॅक्स हैं तो उसकी चर्चा नही होती हैं.

जब भी बजट आता हैं तो चर्चा सिर्फ और सिर्फ इनकम टॅक्स की क्यों होती हैं? मिडीया की यह साजिश तो नहीं?

अब जब कभी भी यह बात सुने तो कृपया इसे याद जरूर रखियेगा.

और एक बात, सरकारी और निजी कंपनीओं मे काम करनेवाले कर्मचारी ही ज्यादातर इनकम टॅक्स देते हैं. कारोबार करनेवाले तो 90 फिसदी लोग इनकम टॅक्स की चोरी करते हैं.

कर्मचारी हर समाज का होता हैं. जिसमें अनु.जाती/ जनजाती/ ओबीसी/ मायनॉरिटी/ महिलाए ही ज्यादातर होती हैं. इसलिए यह भ्रम ठीक नही की सिर्फ विशिष्ट समाजकें ही लोग करदाता हैं. तो यह कर्मचारी याने सभी समाज के लोग भी आयकर देते हैं, सुनते हों मालिक लोग? उंचे लोगों यह भ्रम दुर करो की सिर्फ आपही देशको चलाते हों!

-प्रो.हरी नरके, 24/02/2020

https://www.indiabudget.gov.in/doc/Budget_at_Glance/bag5.pdf
 Receipts (In ` crore) 2020-21
REVENUE RECEIPTS
1. Tax Revenue
Gross Tax Revenue 2423020
a. Corporation Tax 681000
b. Taxes on Income 638000
c. Wealth Tax 41 .. .. ..
d. Customs 138000
e. Union Excise Duties 267000
f. Service Tax 1020
g. GST 690500
- CGST 580000
- IGST 28945 28000 .... ....
- GST Compensation Cess 110500
h. Taxes of Union Territories 7500
Less - NCCD transferred to
the NCCF/NDRF 2930
Less - State’s share 784181
1a Centre’s Net Tax
Revenue 1635909
2. Non-Tax Revenue 385017
Interest receipts 11042
Dividends and Profits 155395
External Grants 812
Other Non Tax Revenue 215465
Receipts of Union
Territories 2303
Total- Revenue Receipts (1a + 2) 2020926
3. CAPITAL RECEIPTS
A. Non-debt Receipts 224967
 (i) Recoveries of loans and
advances@ 14967
 (ii) Disinvestment Receipts 210000
B. Debt Receipts* 849340
Total Capital Receipts (A+B) 1074306
4. Draw-Down of Cash
Balance -53003
Total Receipts (1a+2+3) 3095233
https://www.indiabudget.gov.in/budgetglance.php
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